Thursday, July 7, 2011

विशेष राज्य का दर्जा


विशेष राज्य का दर्जा बिहार का हक है। इसके लिए एकजुट होकर केन्द्र से सघर्ष करने की जरूरत है। सूबे के विपक्षी दलों को भी इसके लिए आगे आना चाहिए। बिहार विधान सभा में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने यह आह्वान किया। बिहार विधान सभा में प्रतिपक्ष के नेता अब्दुला बारी सिद्दिकी ने भी सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि बिना विषेश  दर्जा के सूबा की वांछित तरक्की संभव नहीं है। मुख्यमंत्री नीतीश  कुमार ने भी विधान सभा से बाहर पूछने पर कहा कि बिहार को विषेष राज्य का दर्जा दिलाने के लिए विपक्ष को सहयोग करना चाहिए। यह बिहार का वाजिब हक है। अगर बिहार पिछड़ा रहा है तो इसके लिए केन्द्र की सरकारें ही जिम्मेवार रही हैं। केन्द्र की गलत नीतियों का खामियाजा ही बिहार को भुगतना पड़ा है।
बिहार विधान सभा में उपमुख्यमंत्री सुषील कुमार मोदी ने कहा कि विषेष राज्य का दर्जा बिहार को दिलाने के लिए सत्ताधारी गठबंधन प्रदेष के विपक्षी दलों के साथ मिलकर केन्द्र सरकार के खिलाफ जरूरत पड़ने पर आंदोलन भी करेगा। आवशकता हुई तो बिहार बन्द या इससे भी बड़ा आन्दोलन किया जायेगा। उन्होंने इस लड़ाई में विरोधी दलों का साथ मांगा। श्री मोदी ने कहा कि बिहार के पिछड़ेपन के लिए अगर लालू प्रसाद यादव जिम्मेवार हैं तो उनसे कहीं ज्यादा दोषी कांग्रेस पार्टी है। केन्द्र की उपेक्षा के कारण राज्य में हालात बद से बदतर होते गए। विषेष राज्य का दर्जा मिले बिना हमें अपना मुकाम हासिल करने में परेषानी होगी।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की राजनीतिक अस्थिरता की वजह से प्रदेष का विकास रूक गया। राज्य में 29 साल यानी 1961 से 1990 के बीच कांग्रेसी षासनकाल के दौरान 25 मुख्यमंत्री बदल डाले गए। किसी भी मुख्यमंत्री का कार्यकाल दो साल से ज्यादा नहीं रहा। नतीजा हुआ कि बिहार की सत्ता संभालने वाला हरेक षख्स कुर्सी बचाने की जुगत में ही लगा रह गया। बिहार के विकास की चिन्ता किसी को नहीं रही। लगातार उपेक्षा की वजह से हालात ऐसे हो गए कि स्थापना के 99 साल के बाद भी बिहार विकास के हर मानक पर अंतिम पायदान पर नजर आता है। बिहार की बदहाली का दौर चैथी पंचवर्षीय योजना के समय षुरू हुआ लेकिन कभी भी इसे रोकने का प्रयास नहीं किया गया। आठवीं पंचवर्षीय य ोजना 1992-97 में स्थिति यह हो गयी कि 13000 करोड़ रुपये के योजना आकार की तुलना में 5404 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए।
श्री मोदी ने कहा कि बिहार में सबसे अधिक समय तक कांग्रेस का षासन रहा। इसलिए प्रदेष के पिछड़ेपन का अधिक दोष उसी का है। लालू प्रसाद का दोष यही है कि उन्होंने कभी भी हालात को सुधारने का प्रयास तक नहीं किया। इसलिए उनका पन्द्रह साला कार्यकाल भी बिहार के लिए कए काला अध्याय बन कर रह गया।
विधान सभा मे प्रतिपक्ष के नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी ने कहा कि विषेष राज्य का दर्जा मिले बिना बिहार तरक्की नहीं कर सकता। विधान मंडल ने दो बार इस बाबत प्रस्ताव पास करके केन्द्र को भेजा लेकिन अब तक राज्यवासियों की इस नैसर्गिक मांग को पूरा नहीं किया गया। राज्यहित के सवाल पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री नीतीश  कुमार ने कहा कि केन्द्र सरकार की गलत नीतियों के कारण ही बिहार की उपेक्षा हुई है और इसकी भरपाई विशेष राज्य के दर्जा से कम कुछ नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि भाड़ा समानीकरण जैसी केन्द्र की गलत नीतियों का ही नतीजा रहा कि खनिज झारखंड में और फैक्ट्रियां लगी दूसरे प्रदेषों में। इसी प्रकार गन्ना बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेष में होता है, लेकिन चीनी मिलें लगाई गयी दूसरे प्रदेषों में। अब ऐसा नहीं चलेगा। केन्द्र जब समावेषी विकास की बात करता है तो उसे ऐसी नीतियां बनानी ही होगी जिससे विकास में पीछे छूटे देष के दूसरे हिस्सों का भी समुचित विकास हो सके। बिहार को विषेष राज्य का दर्जा दिलाने की मांग इसी आषय को लेकर है। 

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