Saturday, December 29, 2012

जिंदगी की जंग हार गई दामिनी



13 दिनों से जिंदगी की जंग लड़ रही गैंग रेप पीड़ित आखिरकार जिंदगी की जंग हार गई। भारतीय समयानुसार शनिवार तड़के 2.15 बजे सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ हॉस्पिटल में उनकी मौत हो गई। शनिवार शाम उसके पार्थिव शरीर को एयर इंडिया के विशेष विमान से भारत लाया गया। रविवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा। माउंट एलिजाबेथ हॉस्पिटल के सीईओ डॉ केल्विन लोह ने युवती की मौत की सूचना देते हुए कहा-हमें यह बताते हुए अत्यंत दुख हो रहा है कि मरीज का 29 दिसंबर 2012 की सुबह 4 बज कर 45 मिनट पर (सिंगापुर के समयानुसार) निधन हो गया। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में माउंट एलिजबेथ हॉस्पिटल के डॉक्टर, नर्स और कर्मचारी पीड़ित परिवार के साथ हैं। पिछले दिनों दिल का दौरा पड़ने की वजह से दिमाग में सूजन हो गई थी और इस जाबांज युवती की मौत का बड़ा कारण यही बना। ब्रेन में सूजन की वजह अंदर या बाहर के हिस्से में पानी का जमा होना है। 25 दिसंबर को युवती को दिल का दौरा पड़ा था, जिसके कारण उसके दिमाग में कई स्थान चोटिल भी हुए। ब्रेन में सूजन और कई अंगों के काम करना बंद करने के कारण पीड़ित ने दम तोड़ा। मेदांता हॉस्पिटल के डॉक्टर यतीन मेहता ने कहा, 'मौत की एक प्रमुख वजह ब्रेन में चोट का होना है। मंगलवार को सफदरजंग अस्पताल में दिल का दौरा पड़ा था। इससे दिमाग में चोट आई और कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया।' उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले में आखिकार मौत दिल का दौरा पड़ने से ही होती है। दिल्ली के वसंत विहार में रविवार 16 दिसंबर की रात चलती बस में गैंग रेप के बाद लड़की को बुरी तरह पीटा गया था। सफदरजंग हॉस्पिटल से लड़की को 26 दिसंबर की रात एयर ऐंबुलेंस के जरिए सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ हॉस्पिटल ले जाया गया था। सफदरजंग हॉस्पिटल में लड़की के तीन आॅपरेशन हुए थे। वहां इलाज के दौरान ज्यादातर समय उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। डॉक्टरों ने इन्फेक्शन की वजह से मरीज की आंत को भी आॅपरेशन कर निकाल दिया था। इससे पहले एलिजाबेथ हॉस्पिटल ने शुक्रवार रात को जारी मेडिकल बुलेटिन में कहा था कि लड़की के सिर में गंभीर जख्म हैं, फेफड़ों और पेट में इन्फेक्शन है और वह तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझ रही हैं। माउंट एलिजाबेथ अस्पताल के सीईओ डॉक्टर केल्विन लोह ने कहा था, 'गुरुवार को अस्पताल लाए जाने के बाद हमारे डॉक्टरों की टीम ने जांच में पाया कि दिल का दौरा पड़ने के अलावा उसके फेफड़ों और पेट में इन्फेक्शन है और साथ ही सिर में भी गंभीर जख्म हैं।' सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त टी. सी. ए. राघवन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि लड़की के पैरेंट्स और परिवार के अन्य सदस्य उसकी पार्थिव देह लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि भारत से चार्टर्ड विमान के दोपहर तक पहुंचने की संभावना है। राघवन ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का शोक संदेश लड़की के परिवार वालों तक पहुंचा दिया है। सिंह ने संदेश में भारत को महिलाओं के रहने के लिए सुरक्षित और बेहतर बनाने की इच्छा जाहिर की है। राघवन ने कहा कि लड़की की मौत पर गहरा दुख जाहिर करते हुए उच्चायोग कार्यालय में सिंगापुर सरकार सहित अलग अलग हिस्सों से संदेश आए हैं। उन्होंने पिछले दो दिन में लड़की के इलाज के लिए सिंगापुर के विदेश मंत्रालय, वहां की सरकार और माउंट एलिजबेथ अस्पताल की ओर से किए गए प्रयासों के लिए उनकी सराहना की।

Friday, December 28, 2012

बिहार में शीतलहर



उत्तर प्रदेश के उपर बने पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर पश्चिम बिहार की ओर बढ़ने के कारण उत्तर और मध्य बिहार में कोहरे का प्रकोप है जबकि दक्षिण बिहार में शीतलहर जैसे हालात है और राज्य में रेल तथा हवाई यातायात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक एके सेन ने शुक्रवार को बताया कि उत्तर प्रदेश के उपर बने पश्चिमी विक्षोभ के उत्तर पश्चिम बिहार की ओर बढ़ने के कारण उत्तर और मध्य बिहार में दिन में भी कोहरा छाया हुआ है जबकि रात के न्यूनतम तापमान के सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस नीचे गिरने के कारण बिहार में शीतलहर चल रही है। उन्होंने बताया कि अधिकतम तापमान 23 से 24 डिग्री सेल्सियस के बजाय सामान्य से 8 से 9 डिग्री गिरने के कारण उत्तर और मध्य बिहार के इलाकों में दिन में काफी ठंडक है और दिन में कोहरा छाया हुआ है। सेन ने बताया कि शुक्रवार को राज्य में गया सबसे ठंडा स्थान रहा जहां का न्यूनतम तापमान 4.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी पटना में न्यूनतम तापमान 8.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अपुष्ट खबरों के अनुसार राज्य भर में पिछले तीन दिन में ठंड के कारण 20 लोगों की मौत हुई लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पायी है। राज्य के आपदा प्रबंधन विभाग ने राज्य के शहरी इलाकों में बस पडाव, रैन बसेरों और चौक चौराहों पर अलाव के इंतजाम के लिए कुल मिलाकर 28 लाख रुपये आवंटित किये हैं। मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक ने बताया कि शुक्रवार को राज्य में भागलपुर का न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस, बांका का 5.2 और मुजफ्फरपुर का 9.3 दर्ज किया गया। सेन ने बताया कि मौसम पूवार्नुमान के अनुसार नये वर्ष के अवसर पर 31 दिसंबर और एक जनवरी को मौसम साफ रहने लेकिन ठंडक भरा रहने की संभावना है।
कोहरे ने लगाया ट्रेनों पर ब्रेक
पटना। कोहरे के कारण नई दिल्ली से उत्तर बिहार की ओर आने वाली कई ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ है और कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा है। पूर्व मध्य रेलवे ने बताया कि खराब मौसम के कारण हटिया आनंद विहार स्वर्णजयंती एक्सप्रेस अप और डाउन (12873 और 12874) का परिचालन 31 दिसंबर से आगामी 18 फरवरी तक रद्द कर दिया गया है। आंनद विहार सीतामढ़ी लिच्छवी एक्सप्रेस अप और डाउन (14005 तथा 14006) का परिचालन 28 दिसंबर से 17 फरवरी जबकि जनता एक्सप्रेस अप और डाउन (13039 और 13040) को 28 दिसंबर से 19 फरवरी तक की अवधि के लिए रद्द कर दिया गया है। पूमरे के मुख्य जनसंपर्क पदाधिकारी अमिताभ प्रभाकर ने बताया कि आनंद विहार से बिहार के लिए दो जोडी स्पेशल ट्रेनों का परिचालन रद्द कर दिया गया है। कई ट्रेनों का आंशिक समापन भी किया गया है जबकि कुछ परिवर्तित मार्ग से चलायी जा रही हैं।
हवाई सेवा बाधित,दिल्ली में फंसे सीएम
पटना। हवाई सेवा प्रभावित होने के कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विमान से नई दिल्ली से पटना नहीं आ पाये। राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की बैठक में गुरुवार को शिरकत करने के बाद शुक्रवार की सुबह उन्हें पटना आना था। कोहरे के कारण हवाई यातायात पर बहुत बुरा असर पडा है। पटना स्थित जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खराब दृश्यता के कारण दोपहर ढाई बजे तक न तो किसी विमान ने उड़ान भरी थी और न ही किसी की लैंडिंग हुई। हवाई अड्डा के हवाई यातायात प्रबंधन (एटीम) सूत्रों ने बताया कि एयरपोर्ट पर दृश्यता 600 मीटर रही जबकि सामान्य परिचालन के लिए यह 1600 मीटर होनी चाहिए। खराब दृश्यता के कारण मुंबई से पटना आने वाली गो एयरवेज की उडान को रांची के लिए मार्ग परिवर्तित कर दिया गया।

भारत ने लिया बदला, पाक को 11 रनों से हराया




अहमदाबाद में हुए दूसरे टी-20 मैच में भारत ने पाकिस्तान को 11 रनों से हरा दिया है। भारत ने पाकिस्तान के सामने जीत के लिए 193 रनों का लक्ष्य रखा था। 20 ओवर में पाकिस्तानी टीम 181 रन ही बना पाई। भारत की जीत के साथ ही दो मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर रही।भारत के 192 रनों के जवाब में पाकिस्तानी ओपनरों ने ठोस शुरूआत करते हुए अर्धशतकीय साझेदारी की। लेकिन 9वें ओवर में अश्विन ने पाकिस्तान को झटका देते हुए नासिर जमशेद को 41 के निजी स्कोर पर आउट कर दिया। इसके बाद युवराज सिंह ने 10वें ओवर में शहजाद को 31 रन के निजी स्कोर पर पवेलियन भेज दिया।लेकिन कप्तान मो. हफीज ने जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए मैच को रोमांचक बना दिया। हफीज ने अश्विन के एक ओवर में दो लगातार छक्के भी जड़े।इसके बाद खतरनाक दिख रहे कामरान अकमल भी पवेलियन लौट गए। दोनों बल्लेबाजों को अशोक डिंडा ने पवेलियन भेजा। इससे पहले युवराज सिंह ने धमाकेदार बल्लेबाजी करते हुए भारत को मजबूत स्कोर रखने में मदद की। युवराज ने 36 गेंदों पर 72 रनों की धमाकेदार पारी खेली। अपनी पारी के दौरान युवराज ने छक्कों की बरसात कर 2008 टी-20 वर्ल्ड कप की याद दिला दी। युवराज ने पाकिस्तान के नंबर एक स्पिनर सईद अजमल के एक ओवर में लगातार तीन छक्के भी मारे। युवराज का साथ देने वाले कप्तान महेंद्र सिंह धोनी 23 गेंद पर 33 रन बनाकर आउट हुए। पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। भारत की ओर से गौतम गंभीर और अजिंक्य रहाणे ने बल्लेबाजी करने उतरे और दोनों के भारत को अच्छी शुरूआत दिलाई। आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी कर रहे गंभीर को 21 रन पर उमर गुल ने एलबीडब्ल्यू आउट कर दिया। दोनों बल्लेबाजों के बीच 44 रनों की साझेदारी हुई। गौतम गंभीर के बाद रहाणे भी 28 रन पर आउट हो गए। रहाणे को भी उमर गुल ने ही पवेलियन भेजा। इसके बाद विराट कोहली 27 रन बनाकर सोहेल तनवीर का शिकार बने। इसके बाद धोनी मैदान पर उतरे। लेकिन इस बीच युवराज और कोहली के बीच अच्छी साझेदारी हो चुकी थी। युवराज और धोनी ने टीम का स्कोर 100 रन के पार पहुंचा दिया। पाकिस्तान ने अपनी टीम में कोई बदलाव नहीं किया है। जबकि भारतीय टीम में एक बदलाव किया गया है। रवींद्र जडेजा की जगह स्पिनर आर अश्विन को शामिल किया गया है। बैंगलोर टी-20 में कड़ी आलोचना के बाद कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने अश्विन को खिलाने का फैसला लिया।

फैसला सवालों के घेरे में



दिल्ली में गैंगरेप की शिकार युवती को इलाज के लिए एकाएक सिंगापुर भेजने का सरकार का फैसला सवालों के घेरे में आ गया है। खुद डॉक्टरों ने सरकार के इस फैसले पर अंगुली उठानी शुरू कर दी है। एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार सफदरजंग अस्पताल में भर्ती 23 वर्षीय गैंगरेप पीड़िता को इलाज के लिए सिंगापुर भेजने के पीछे मेडिकल कारण कम और राजनीतिक कारण ज्यादा नजर आ रहे हैं। अखबार के अनुसार जब सामूहिक दुष्कर्म की शिकार पीड़िता को सिंगापुर शिफ्ट करने का फैसला लिया गया तो इलाज कर रहे डॉक्टरों से बस इतना पूछा गया कि क्या पीड़िता सिंगापुर जाने की स्थिति में है? सरकार ने इलाज कर रहे डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम से यह नहीं पूछा कि सिंगापुर शिफ्ट किया जाए या नहीं? या फिर वहां दिल्ली से बेहतर किस मामले में इलाज होगा। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि सरकार फैसला ले चुकी थी कि पीड़िता को सिंगापुर भेजा जाए। डॉक्टरों ने बताया कि हम यहां मरीज को बेहतर चिकित्सा दे रहे थे। अखबार के अनुसार पीड़िता को सिंगापुर भेजने का निर्णय डॉक्टरों का नहीं था, बल्कि सरकार की तरफ से लिया गया फैसला है। एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर का कहना है कि जब प्रधानमंत्री का यहां आॅपरेशन और इलाज हो सकता है तो फिर एक मरीज को सिंगापुर भेजने की क्या जरूरत थी। एम्स के जेपीएन ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख डॉ. एमसी मिश्रा का कहना है कि सरकार के निर्देश और छात्रा के हित को ध्यान में रखकर उसे सिंगापुर भेजे जाने का निर्णय लिया गया है। अखबार ने सर गंगाराम अस्पताल में आॅर्गन ट्रांसप्लांट और गेस्ट्रो सर्जरी डिपार्टमेंट के चेयरमैन डॉ. समीरन नंदी के हवाले से लिखा है कि जब पीड़िता खून से लथपथ थी,उसकी हालत बेहद नाजुक थी और उसे कई दिनों से वेंटिलेटर पर रखा जा रहा था तब ऐसे हालात में उसे सिंगापुर भेजना वाकई में संदेहास्पद है। वैसे पूरा देश पीड़िता की प्राण रक्षा के लिए दुआ कर रहा है। सरकार को भी इस मामले में राजनीति से परे रहने की जरूरत है।

Thursday, December 27, 2012

हर हाल में मिले विशेष राज्य का दर्जा: नीतीश



मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को राष्ट्रीय विकास परिषद् (एनडीसी)की बैठक में अपने प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पुरजोर ढंग से फिर उठाते हुए केंद्र सरकार से अपील की कि वह देश के सकल घरेलू उत्पाद में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाने तथा प्रति व्यक्ति आय को राष्ट्रीय औसत के बराबर पहुंचाने एवं विकास दर में वृद्धि के लिए राष्ट्रहित में उनकी मांग पर विचार करें। श्री कुमार ने विज्ञान भवन मेंं 12वीं पंचवर्षीय योजना के अनुमोदन के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में एन डी सी की 57 वीं बैठक में कहा कि बिहार को विशेष श्रेणी के राज्य का दर्जा देने के लिए वह गत छह वर्षों से मुहिम चला रहे हैं और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इसके लिए एक अंतर्मंत्रालीय समूह का गठन भी किया पर इस समूह ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर विशेष दर्जे के लिए पूर्व निर्धारित मानकों के आधार पर ही निष्कर्ष निकाल दिया।
उन्होंने कहा कि बिहार की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत की एक तिहाई है। प्रथम पंचवर्षीय योजना से ही बिहार की प्रति व्यक्ति आय एवं राष्ट्रीय प्रति व्यक्ति आय में अंतर बढ़ता जा रहा है। राज्य में प्रति व्यक्ति आय के राष्ट्रीय औसत को प्राप्त करने में 25-30 वर्ष लगेंगें। इसलिए 12 वीं पंचवर्षीय योजना में राज्य के विकास के लिए विशेष ध्यान देना होगा ताकि प्रति व्यक्ति की आय की इस खाई को कारगर तरीके से पाटा जा सके। उन्होंने कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना में भारतीय अर्थव्यवस्था की औसत विकास दर 7.94 प्रतिशत रही जबकि बिहार की औसत विकास दर 12.11 प्रतिशत रही। बिहार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में 13 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य रखा है। लेकिन 12 वीं पंचवर्षीय योजना में भी राज्य योजना हेतु सकल बजटीय सहायता 25.62 से घटकर 24.04 प्रतिशत हो गयी है। यह हमारी अर्थव्यवस्था के संघीय ढांचे के विपरीत हैं। इस प्रवृति को बदलना चाहिए और राज्यों के लिए सकल बजटीय सहायता बढ़ाकर कम से कम 10 प्रतिशत तक करना चाहिए। श्री कुमार ने यह भी कहा कि बिहार प्रति व्यक्ति आय के न्यूनतम स्तर पर होने के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक एवं अन्य आर्थिक सेवाओं पर प्रति व्यक्ति खर्च में भी सबसे निचले पायदान पर है। बिहार में प्रति व्यक्ति विकास खर्च 3600 रुपये है जबकि राष्ट्रीय औसत 6100 रुपये है। इसलिए बिहार को प्रति व्यक्ति विकास खर्च के राष्ट्रीय औसत की कतार में लाने के लिए अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिहार राज्य ने पिछले पांच वर्षो में तीव्र आर्थिक विकास दर को हासिल किया है। वह राष्ट्रीय सकल घरेल उत्पाद में अपनी भागीदारी को सार्थक रुप में बढ़ाना चाहता है। विशेष राज्य का दर्जा कई मामलों में मदद करेगा। केन्द्रीय योजनाओं में केन्द्र का हिस्सा 90 प्रतिशत बढ़ जाएगा। राज्य के हिस्सों में बचत होने से हम अधिक कल्याणकारी योजनाएं बना सकेंगे। इसके अतिरिक्त प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष करों में कटौती मिलने से निजी निवेशों को बढावा मिलेगा। इससे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में निजी निवेश हो सकेगा और रोजगार के अनेक अवसर उत्पन्न होंगे।
उन्होंने कहा कि अन्तमंत्रालीय समूह ने भी 12वीं पंचवर्षीय योजना में बिहार के लिए विशेष योजना को जारी रखने की सिफारिश की थी। पिछली देनदारियों के अलावा 12वीं पंचवर्षीय योजना में प्रतिवर्ष अतिरिक्त 4000 करोड़ रुपये देने का विशेष अनुरोध करता हूं ताकि बिहार एवं अन्य राज्यों के बीच आधारभूत संस्थानाओं एवं विकास की इस खाई को पाटा जा सके। उन्होंने शिक्षा के अधिकार कानून के क्रियान्वन की अवधि बढ़ाने की भी मांग की क्योंकि बिहार 31 मार्च 2013 तक इस कानून को लागू नहीं कर सकता क्योंकि उनके पास संसाधनों की कमी है। उन्होंने यह भी कहा कि योजना आयोग एवं केन्द्र सरकार के स्तर पर पिछड़ा क्षेत्र अनुदान फंड के तहत योजनावार स्वीकृति दी जाती थी। इसके कारण योजनाओं के क्रियान्वन में काफी देर हुई। इसलिए इस विशेष योजनाओं के तहत योजनाओं की स्वीकृति का अधिकार राज्य सरकार को दिया जाए। मुख्यमंत्री ने बच्चों में अतिकुपोषण को दूर करने के लिए राष्ट्रीय पोषण मिशन की स्थापना की भी मांग की।

सबसे तेजी से बढ़ता क्राइम रेप,दिल्ली नंबर 1 पर







 


देशभर में महिलाओं के खिलाफ यौन अपराध चिंताजनक रफ्तार से बढ़ रहे हैं। पिछले चार दशकों में अन्य अपराधों की तुलना में रेप की संख्या में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी हुई है और इनसे जुड़े दोषियों को सजा देने के मामले में हम सबसे पीछे रहे हैं। दिल्ली में गैंगरेप से पहले पड़ोसी हरियाणा में ही पिछले कुछ महीनों में रेप के एक के बाद एक 15 मामले सामने आए, जिसमें ज्यादातर गैंगरेप के केस थे। इसी तरह पंजाब के अमृतसर में पिछले महीने एक पुलिस अधिकारी को इसलिए मौत के घाट उतार दिया गया कि वह अपनी बेटी को यौन उत्पीड़न से बचाने की कोशिश कर रहा था।
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजे आकंड़े दिखाते हैं कि 1971 से 2011 के बीच रेप की घटनाओं में 873.3 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 1971 में जहां रेप की 2,487 मामले सामने आए थे, वहीं, 2011 में यह आंकड़ा 24,206 तक पहुंच गया। इसकी तुलना में पिछले छह दशकों यानी 1953 से 2011 के बीच हत्या के मामले में 250 फीसद की ही बढ़ोतरी हुई। 1970 तक रेप की घटनाओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दी जाती थी इसलिए तब तक इसका रिकॉर्ड भी इकट्ठा नहीं किया जाता था लेकिन 1971 से एनसीआरबी ने आंकड़ा रखना शुरू किया।
रेप की घटनाओं में वृद्धि की रफ्तार, तमाम अपराधों की तुलना में तीन गुना ज्यादा है और हत्याओं की तुलना में साढ़े तीन गुना। पिछले पांच वर्षो में रेप की घटनाओं में 9.7 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। कुछ हफ्ते पहले ब्रिटिश अखबार गार्जियन ने जी-20 के देशों में भारत को महिलाओं के लिए सबसे बुरा जगह करार दिया था। इसके साथ महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय संस्था ने एक सर्वे में कहा था कि भारत महिलाओं के सबसे खतरनाक जगहों में आता है और इसमें उनका साथ दे रहे हैं अफगानिस्तान, सोमालिया और कांगो। भारत में औसतन हर 40 मिनट में एक महिला यौन उत्पीड़न या घरेलू हिंसा का शिकार हो रही हैं।
देश के महानगरों में दिल्ली शर्मनाक तरीके से रेप के मामले में सबसे आगे है। पिछले पांच सालों में राजधानी में रेप की 2620 घटनाएं दर्ज की गई थीं। इसकी तुलना में मुंबई में 1033, बेंगलूर में 383, चैन्नई में 293 और कोलकाता में 200 मामले दर्ज किए गए थे। इससे भी बदतर स्थिति रेप के मामले में दोषियों को सजा देने में है। देश में रेप के आरोपियों को सजा देने का औसत 11 फीसद है जबकि हत्या या अन्य अपराधों में औसत 28 फीसद है। 2002 से 2011 के बीच यानी पिछले एक दशक में रेप के 5337 मामलों में फैसले आए थे और इनमें से 3860 मामलों में आरोपियों को या तो बरी कर दिया गया या फिर समुचित साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने छोड़ दिया। पूरे देश को देखा जाए तो 2001 से 2010 बीच, रेप के मामलों में आरोप साबित करने की दर 26 फीसद ही रही है। यह हत्याओं के मामले में आरोप साबित करने की 35 फीसद की दर से नौ फीसद कम है। निवारक सजा की तो बात दूर, ऐसा लगता है कि हमारे देश में अपराध के लिए सजा दिए जाने का रिकॉर्ड इतना खराब होने के चलते ही, अपराधियों के मन में अब कानून का कोई डर ही नहीं रह गया है। जहां तक रेप के मामले में वर्ष 2011 के रिकॉर्ड का सवाल है मध्यप्रदेश 3406 रेप केस के साथ अव्वल रहा, वहीं पश्चिम बंगाल 2363 केस, उत्तर प्रदेश 2042 केस, राजस्थान 1800 केस, महाराष्ट्र 1701 केस, असम 1700 केस और आंध्र प्रदेश 1442 के साथ क्रमश: दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें, छठे और सातवें नंबर पर रहा। इसके साथ ही पिछले वर्ष 572 रेप के मामलों के साथ मेट्रो पोलिटन शहरों में सबसे अव्वल रहा।

Wednesday, December 26, 2012

कांस्टेबल की मौत पर झूठ बोल रही है दिल्ली पुलिस: चश्मदीद चोट के कारण कांस्टेबल की मौत: पोस्टमार्टम रिपोर्ट



गैंगरेप के विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल होने के बाद मंगलवार को अस्पताल में दम तोड़ने वाले दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल सुभाष तोमर की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आ गई है। दिल्ली पुलिस ने दावा किया है कि सुभाष तोमर की मौत चोट की वजह से हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर के सी द्विवेदी ने कहा कि चोट की वजह से सुभाष तोमर को दिल का दौरा पड़ा जिस वजह से उनकी मौत हो गई।दिल्ली पुलिस ने कहा, 'मृत कांस्टेबल के सीने, गर्दन और पैर में भी चोट लगी थी। गौरतलब है कि सुभाष तोमार की मौत का मामला पल-पल नया रूप लेता जा रहा है। इससे पहले राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉ. टीएस सिद्धू ने कहा था कि कांस्टेबल के शरीर पर किसी तरह की चोट नहीं थी। आरएमएल के डॉक्टर टी एस सिद्धू का कहना है कि सुभाष तोमर जब अस्पताल लाए गए, तब उनके शरीर पर बाहरी या अंदरूनी चोट के निशान नहीं थे।गौरतलब है कि मौके पर सुभाष तोमर को अस्पताल में भर्ती करवाने वाले एक चश्मदीद ने भी ऐसा ही दावा किया था। चश्मदीद योगेन्द्र का कहना है कि सुभाष तोमर को भीड़ ने कोई नुकसान नहीं पहुंचाया था, बल्कि वे खुद ही गिर पड़े थे। योगेन्द्र का समर्थन पाउलीन नामक एक लड़की ने भी की है, जो उस समय योगेन्द्र के साथ ही कांस्टेबल की मदद कर रही थी। इन दोनों के उस समय अनुसार  सुभाष के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं दिख रहे थे।
जनता की पिटाई या आंसू गैस के धुएं व लाठीचार्ज से मची भगदड़ के बाद हार्ट अटैक। दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल सुभाष चंद तोमर की मौत की असल वजह इनमें से क्या हो सकती है? मौत की वजह पर उलझन बढ़ती ही जा रही है। इस बीच चश्मदीद महिला पाउलिन ने यह कहकर मामले को और उलझा दिया है कि पुलिस झूठ कह रही है। दरअसल सुभाष के आस-पास भीड़ थी ही नहीं तो भीड़ द्वारा उन्हें पीटे जाने का तो सवाल ही नहीं उठता। पाउलिन ने यह कहकर दिल्ली पुलिस की मुश्किल और बढ़ा दी है कि जिस वक्त तोमर की हालत बिगड़ रही थी उस वक्त पुलिस के लोगों ने उनकी मदद नहीं की। उनकी मौत पुलिस की वजह से हुई न कि प्रदर्शनकारियों की वजह से। उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस सुभाष की मौत के बहाने गैंगरेप के मामले को दबाना चाहती है। वहीं दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने खुद अपने साथी की मौत की जांच करने का फैसला किया है। वहीं केंद्र सरकार ने सिपाही के परिजनों को दस लाख रुपये देने की घोषणा की है। मौत पर गहराए रहस्य की क्राइम ब्रांच जांच करेगी। इस मामले में आठ लोगों पर केस दर्ज कर लिया गया है। इनमें अरविंद केजरीवाल की 'आप' पार्टी का एक कार्यकर्ता भी शामिल हैं। वहीं अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी के किसी भी कार्यकर्ता के शामिल होने की बात से इंकार करते हुए उल्टा दिल्ली पुलिस की जांच पर ही सवाल उठा दिए। इंडिया गेट के समीप रविवार को ड्यूटी के दौरान मारे गए सिपाही सुभाष चंद तोमर को घटना के वक्त सहारा देने वाले युवक योगेंद्र के मुताबिक सिपाही की मौत प्रदर्शनकारियों के हमले से नहीं बल्कि भीड़ के पीछे भागने के दौरान हुई थी। प्रदर्शनकारियों के पीछे भागते वक्त वे थोड़ी देर के लिए रुके थे बाद में सड़क पर गिर पड़े थे। इसके बाद सुभाष को योगेंद्र, एक युवती व पुलिसकर्मियों ने सहारा भी दिया था। उन लोगों ने सुभाष के जूते खोले, हथेली रगड़ी तथा उनके सीने को दबाकर सांस देने की कोशिश की थी। लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका। मालूम हो कि पुलिस आयुक्त नीरज कुमार ने मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान सिपाही की मौत का कारण प्रदर्शनकारियों का उन पर हमला करना बताया था। इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा भी दर्ज किया गया है। पुलिस आयुक्त ने दावा किया था कि सिपाही के शरीर पर कई गंभीर चोट के निशान थे। लेकन योगेंद्र ने बताया कि बेसुध होने के बाद अन्य पुलिसकर्मियों की मदद से सुभाष चंद की वर्दी खोली थी। उस वक्त उनके सीने व दाहिने हाथ में सिर्फ खरोच के निशान मिले थे।
दिल्ली पुलिस आयुक्त नीरज कुमार कहते हैं कि पेट, छाती और गर्दन में चोट के निशान पाए गए हैं। सिपाही रविवार को इंडिया गेट पर प्रदर्शनकारियों के उपद्रव का शिकार हुआ है। वहीं राम मनोहर लोहिया अस्पताल, जहां सिपाही की मौत हुई, वहां के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. टीएस सिद्धू कहते हैं, सदमे के चलते सिपाही को हार्ट अटैक आया था। उसके शरीर पर कहीं भी गंभीर चोट के निशान नहीं थे। अस्पताल के सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि सिपाही को हृदय से संबंधित बीमारी पहले से थी। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब इंडिया गेट पर इतना बड़ा प्रदर्शन चल रहा था तो हृदय रोगी सिपाही की वहां ड्यूटी क्यों लगाई गई? हालांकि इस बारे में दिल्ली पुलिस का कोई अधिकारी कुछ नहीं कह रहा है। सोशल नेटवर्किंग साइट पर इस मामले में कई फोटो भी शेयर हो रहे हैं। जिनमें सुभाष चंद जमीन पर लेटे दिख रहे हैं। पुलिसकर्मियों के साथ कुछ प्रदर्शनकारी जिनमें युवती भी शामिल है, उनके हाथों की मालिश कर रहे हैं। सोशल साइट पर ही सवाल उठाया गया है कि जब कोई व्यक्ति चक्कर खाकर या कोई दौरा आदि आने से गिरता है तभी उसके हाथ पैर की मालिश होती है, प्रदर्शनकारियों की पिटाई से घायल को तो तत्काल अस्पताल पहुंचाया जाता है। इस बाबत दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त ताज हसन जो स्वयं रविवार को इंडिया गेट पर मौजूद थे और पुलिस बल का नेतृत्व का रहे थे। ताज हसन ने कहा है कि कांस्टेबल सुभाष इंडिया गेट पर कानून व्यवस्था संभालने की ड्यूटी पर था। उसे बेहोशी हालत में उठाया गया था। हमने एक बहादुर सिपाही को खो दिया है। इसका दुख है। जबकि सोमवार को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने दावा किया था कि सुभाष को मारा-पीटा गया। वह नीचे गिर गया तो लोग उसके ऊपर से गुजरते चले गए। आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक सिद्धु कहते हैं दिल्ली पुलिस के सिपाही सुभाष तोमर को जब अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में लाया गया था, उसे गहरा सदमा लगा था। जिसकी वजह से उसे हृदयाघात हुआ। इमरजेंसी वार्ड में पहुंचने के बाद उसे आइसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया था। उसके शरीर में कहीं भी गंभीर चोट के निशान नहीं थे। सिर्फ हाथ व सीने पर मामूली चोट थी। उन्होंने कहा कि सुभाष की कोई सर्जरी करने का मौका नहीं मिल पाया। अस्पताल सूत्रों की मानें तो सिपाही को सुबह 6:22 पर एक और हार्ट अटैक आया था, जो उसकी मौत का कारण बना। चिकित्सा अधीक्षक से जब पूछा गया कि पुलिस सिपाही की मौत का कारण पिटाई से लगी चोट बता रही है, तो उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चल जाएगा कि सच्चाई क्या है। कुछ यही जवाब पुलिस आयुक्त नीरज कुमार का था। उनसे सवाल किया गया तो जवाब था मैं डाक्टर नहीं हूं। हार्ट अटैक चोट की वजह से हुआ या बिना चोट के, यह मैं नहीं बता सकता। लेकिन उसके शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। मौत की असली वजह दो दिन में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आ जाएगी। खास बात यह है कि दिल्ली पुलिस के जवानों में हृदयरोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तनाव तथा मोटापे संबंधी बीमारियां आम बात है। लंबी ड्यूटी व अत्यधिक तनाव में काम करने का असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है इसका खुलासा हाल ही में एक निजी अस्पताल द्वारा पुलिसकर्मियों की हेल्थ जांच में हुआ था। सवाल यह भी है कि देश की राजधानी में सख्त ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य की चिंता करने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?