मनमोहन सिंह कैबिनेट का चेहरा बदलने की की तैयारी में है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आखिरी दौर की वार्ताएं शुरू कर दी हैं। भ्रष्टाचार के चौतरफा आरोपों से बाहर निकलने की जद्दोजहद में मनमोहन-सोनिया के सामने परफार्मेंस और गुड गवर्नेंस के आधार पर कवायद को अंजाम देने की चुनौती है। दिल्ली में कैबिनेट फेरबदल के मुद्दे पर पिछले 15 दिनों में तीसरी बार सोनिया-मनमोहन की मुलाकात हुई है। बताया जा रहा है कि सोमवार शाम तक मंत्रिमंडल में फेरबदल हो जाएगा।
2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में घिरे कपड़ा मंत्री दयानिधि मारन का इस्तीफा, कारपोरेट मामलों के मंत्री मुरली देवड़ा की इस्तीफे की पेशकश भी इसके पीछे जिम्मेदार बताई जा रही है। इस घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व दूरसंचार मंत्री ए.राजा पहले से ही जेल पहुंच चुके हैं।
शनिवार को दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की। नई एंट्री के तौर पर पूर्व मंत्री शिवराज पाटिल के लिए भी लॉबिंग जारी है। हालांकि पाटिल को महाराष्ट्र से राज्यसभा की सीट नहीं मिल पाई, जिससे उनके कैबिनेट में आने की संभावना कम हो गई है।
लाल, बालू व पासवान को मिल सकती है जगह
वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को चेन्नई में द्रमुक सुप्रीमो एम. करुणानिधि से मुलाकात की। चर्चा के बाद प्रणब ने स्पष्ट किया कि गठबंधन पर कोई खतरा नहीं है। सूत्रों का कहना है कि मंत्रिमंडल में द्रमुक पार्टी के खाते की दो रिक्तियों के लिए नए नाम फिलहाल नहीं देगा। वैसे, पार्टी के संसदीय प्रमुख टीआर बालू, पार्टी प्रवक्ता केएस इलंगोवान और एकेएस विजयन को कैबिनेट में लिए जाने की चर्चा है। उधर, राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव व रामविलास पासवान भी मंत्रिमंडल में जगह बनाने के लिए पूरा जोर लगाए हुए हैं और सोनिया से मुलाकात भी कर चुके हैं।
बेदागों को ही रखो टीम में -अन्ना
मुंबई. समाजसेवी अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री को सलाह दी है कि वह अपने कैबिनेट सहयोगियों में स्वच्छ चरित्र और सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करें। हजारे से दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल पर लग रहे आरोपों पर सवाल पूछा गया था, जिसका सीधा जवाब उन्होंने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। सिब्बल और हजारे लोकपाल बिल के लिए बनी संयुक्त मसौदा समिति के सदस्य थे और दोनों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला था।
Sunday, July 10, 2011
कालका मेल पटरी से उतरी, 18 की मौत
उत्तर प्रदेश में फतेहपुर जिले के मलवा रेलवे स्टेशन के पास रविवार दोपहर हावड़ा-दिल्ली कालका मेल के 13 डिब्बे पटरी से उतर गए। इस हादसे में अभी तक 18 लोगों के मारे जाने और 100 के घायल होने की खबर है। रेलवे पीआरओ ने इसकी पुष्टि कर दी है। यह तादाद बढ़ सकती है। घायलों को ट्रेन से निकालने का काम जारी है।
जानकारी के मुताबिक 50 से 60 यात्री अभी भी बोगियों में फंसे हुए हैं। गैस कटर की मदद से उन्हें निकाला जा रहा है। रेलवे ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन, यूपी सरकार और रक्षा मंत्रालय से भी मदद मांगी है। मौके पर सेना के 100 जवान भेजे गए हैं। उधर, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हादसे की खबर मिलने के बाद राहत कार्य के लिए हर संभव मदद भेजने का निर्देश दिया है। इस हादसे की जांच रेलवे के सेफ्टी कमिश्नर करेंगे।
जानकारी के मुताबिक 50 से 60 यात्री अभी भी बोगियों में फंसे हुए हैं। गैस कटर की मदद से उन्हें निकाला जा रहा है। रेलवे ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन, यूपी सरकार और रक्षा मंत्रालय से भी मदद मांगी है। मौके पर सेना के 100 जवान भेजे गए हैं। उधर, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हादसे की खबर मिलने के बाद राहत कार्य के लिए हर संभव मदद भेजने का निर्देश दिया है। इस हादसे की जांच रेलवे के सेफ्टी कमिश्नर करेंगे।
Friday, July 8, 2011
2जी स्पेलक्ट्रम का भूत
2जी स्पेलक्ट्रलम नाम का भूत यूपीए का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है। यूपीए के 2 केबिनेट मंत्री ए राजा और दयानिधि मारन इसकी भेंट चढ़ चुके हैं। ये मंत्री तो सहयोगी पार्टी डीएमके के थे। अब इस मामले में कांग्रेस के अपने ही मंत्री कपिल सिब्बइल का नाम आ रहा है। कपिल सिब्ब ल पर अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युेनिकेशन पर लगे 650 करोड़ के अर्थदंड को घटाकर केवल 5 करोड़ करने का आरोप है।
2जी स्पेवक्ट्र म घोटाले में फंसने और इस्ती फा देने के बाद कपिल सिब्बकल के पास संचार मंत्रालय का अतिरिक्त़ कार्यभार है। गैर-सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटेरेस्ट लिटिगेशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें सिब्बेल पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इन्फोकॉम पर लगे 650 करोड़ रुपये के हर्जाने को कम करके 5 करोड़ करने का आरोप लगाया गया है।
रिलायंस कंपनी को 2जी लाइसेंस आवंटन के समय 13 सर्किलों में सेवा उपलब्धन कराने का लाइसेंस दिया गया था। रिलायंस कंपनी ने 2जी नियमों का उलंघन करते हुए इन सर्किलों में रिमोट इलाकों में सेवा बंद कर दी। इसके बाद इस मामले में कंपनी पर हर सर्किल पर 50 करोड़ के हिसाब से जुर्माना ठोका गया था। इस हिसाब से जुर्माने की रकम 650 करोड़ रुपए बनती थी। तत्का लीन संचार मंत्री कपिल सिब्बबल ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों की बात नकारते हुए इस निजी कंपनी का हर्जाना घटाकर 5 करोड़ कर दिया। जिससे सरकारी राजस्वद को 645 करोड़ का नुकसान हुआ है।
इस मामले में अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवटी की भूमिका की भी जांच की जाएगी। उन पर भी कपिल सिब्बसल के साथ मिलकर पूर्व संचार मंत्री ए राजा के पक्ष्ाट में राय देने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अगली सुनवाई 11 जुलाई तक होनी है। अगर इस बार कपिल सिब्बरल पर भी मामला साबित हो गया तो 2जी स्पेकक्ट्र म मामले में इस बार कांग्रेस की भी किरकिरी हो सकती है। पहले तो इस मामले में यूपीए ने डीएमके के सांसदों के शामिल होने की बात कहकर अपना पल्लाा झाड़ लिया था।
2जी स्पेवक्ट्र म घोटाले में फंसने और इस्ती फा देने के बाद कपिल सिब्बकल के पास संचार मंत्रालय का अतिरिक्त़ कार्यभार है। गैर-सरकारी संगठन सेंटर फॉर पब्लिक इंटेरेस्ट लिटिगेशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें सिब्बेल पर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस इन्फोकॉम पर लगे 650 करोड़ रुपये के हर्जाने को कम करके 5 करोड़ करने का आरोप लगाया गया है।
रिलायंस कंपनी को 2जी लाइसेंस आवंटन के समय 13 सर्किलों में सेवा उपलब्धन कराने का लाइसेंस दिया गया था। रिलायंस कंपनी ने 2जी नियमों का उलंघन करते हुए इन सर्किलों में रिमोट इलाकों में सेवा बंद कर दी। इसके बाद इस मामले में कंपनी पर हर सर्किल पर 50 करोड़ के हिसाब से जुर्माना ठोका गया था। इस हिसाब से जुर्माने की रकम 650 करोड़ रुपए बनती थी। तत्का लीन संचार मंत्री कपिल सिब्बबल ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों की बात नकारते हुए इस निजी कंपनी का हर्जाना घटाकर 5 करोड़ कर दिया। जिससे सरकारी राजस्वद को 645 करोड़ का नुकसान हुआ है।
इस मामले में अटॉर्नी जनरल जीई वाहनवटी की भूमिका की भी जांच की जाएगी। उन पर भी कपिल सिब्बसल के साथ मिलकर पूर्व संचार मंत्री ए राजा के पक्ष्ाट में राय देने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अगली सुनवाई 11 जुलाई तक होनी है। अगर इस बार कपिल सिब्बरल पर भी मामला साबित हो गया तो 2जी स्पेकक्ट्र म मामले में इस बार कांग्रेस की भी किरकिरी हो सकती है। पहले तो इस मामले में यूपीए ने डीएमके के सांसदों के शामिल होने की बात कहकर अपना पल्लाा झाड़ लिया था।
गांधी सेतु का जिम्मा एनएचएआई को
लंबे इंतजार के बाद आखिरकार गांधी सेतु एनएचएआई को सौंप दिये जाने के फैसले पर मुहर लग गयी। पथ निर्माण विभाग के सचिव प्रत्यय अमृत और पथ परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सचिव ए के उपाध्याय की दिल्ली में इस मुद्दे पर बैठक हुई। बैठक में तय हुआ कि गांधी सेतु को एनएचएआई को सौंपे जाने की अधिसूचना अगले एक हफ्ते के भीतर जारी कर दी जायेगी। बैठक में डुमरी पुल के डिजायन पर भी सकारात्मक चर्चा हुई। बिहार के लिए महत्वपूर्ण बात यह है पथ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव 11 जुलाई को पटना में बिहार की विभिन्न सड़क परियोजनाओं पर चर्चा करेंगे।
गांधी सेतु की मरम्मत का प्रस्ताव लंबी अवधि से पथ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पास लंबित था। पिछले दिनों प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के हस्तक्षेप पर पथ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के डीजी ने पूरी टीम के साथ गांधी सेतु का निरीक्षण किया था। उस समय यह तय हुआ था कि गांधी सेतु की मरम्मत का जिम्मा एनएचएआई खुद ले लेगी। मंत्रालय के स्तर पर इस बाबत एक बैठक भी हुई थी। उसी समय से यह इंतजार किया जा रहा था कि गांधी सेतु की मरम्मत का काम एनएचएआई को सौंपा जा सकता है। शुक्रवार को हुई बैठक में इस पर आधिकारिक रूप से फैसला ले लिया गया।
पथ निर्माण विभाग का यह प्रस्ताव है कि गांधी सेतु के सुपर स्ट्रक्चर को पूरी तरह से तोड़ दिया जाये तभी इस पुल को बताया जा सकता है। गांधी सेतु की मरम्मत अभी किस्तों में होती रही है। पथ निर्माण विभाग ने पुल क्षेत्र के एक विशेषज्ञ से इस बारे में रिपोर्ट बनाकर पथ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को सौंप रखी है।
गांधी सेतु की मरम्मत का प्रस्ताव लंबी अवधि से पथ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के पास लंबित था। पिछले दिनों प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के हस्तक्षेप पर पथ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के डीजी ने पूरी टीम के साथ गांधी सेतु का निरीक्षण किया था। उस समय यह तय हुआ था कि गांधी सेतु की मरम्मत का जिम्मा एनएचएआई खुद ले लेगी। मंत्रालय के स्तर पर इस बाबत एक बैठक भी हुई थी। उसी समय से यह इंतजार किया जा रहा था कि गांधी सेतु की मरम्मत का काम एनएचएआई को सौंपा जा सकता है। शुक्रवार को हुई बैठक में इस पर आधिकारिक रूप से फैसला ले लिया गया।
पथ निर्माण विभाग का यह प्रस्ताव है कि गांधी सेतु के सुपर स्ट्रक्चर को पूरी तरह से तोड़ दिया जाये तभी इस पुल को बताया जा सकता है। गांधी सेतु की मरम्मत अभी किस्तों में होती रही है। पथ निर्माण विभाग ने पुल क्षेत्र के एक विशेषज्ञ से इस बारे में रिपोर्ट बनाकर पथ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को सौंप रखी है।
Thursday, July 7, 2011
बिहार में नहीं खर्च हो रहा एमपी फंड
बिहार में पिछले दिनों में विकास कार्यों को गति मिली हैं, सरकार का ऐसा ही कुछ दावा हैं. आरोप यह भी हैं कि केंद्र बिहार कि जरूरतों के अनुसार सहयोग नहीं कर रहा हैं. एक हद तक राज्य सरकार के इस आरोप को मान भी लिया जय तब भी कई ऐसे सवाल हैं जो अनुतरित रह जाते हैं. मसलन केन्द्रीय योजनाओं की शत प्रतिशत राशि का खर्च नहीं होना, एमपी फंड का पड़ा रह जाना आदि. पिछले वर्ष मार्च यानि २०१० के मार्च तक एमपी फंड में प्राप्त राशि में से २५१ करोड़ का खर्च नही होना तो यही साबित करता हैं कि राज्य के प्रशासनिक तंत्र में ही कहीं न कहीं खामी हैं. लोकसभा से प्राप्त ११७१ करोड़ कि राशि में से १८० करोड़ तथा राज्यसभा से प्राप्त ४७२ करोड़ में से ७१ करोड़ रूपये पड़े रह गए. आखिर ये रूपये क्यों नहीं खर्च हुए, इसका माकूल जवाब किसी के पास नहीं हैं. राज्य सरकार का अपना तर्क हैं. केंद्र से उसने प्रशासनिक व्यय वहां करने की मांग के साथ ही मोनिटरिंग सिस्टम की जिम्मेवारी लेने को कहा हैं. तर्क यह भी है की राज्य की अपनी योजनायें इतनी हैं की उसका प्रशासनिक आमला उसे ही सँभालने में लगा हुआ हैं. ऐसे में केंद्रीय योजनाओं और एमपी फंड का कार्यान्वयन मुश्किल हो रहा हैं. दूसरी शिकायत एमपी द्वारा खर्च की अनुशंसा का नहीं मिलना भी हैं. ४० में से २० सांसदों की ओर से किसी भी योजना की कोई अनुशंसा नहीं मिली हैं.इनमे राजद सुप्रीमो और सारण के सांसद लालू प्रसाद, भागलपुर के सैयद शहनाज हुसैन, पूर्वी चंपारण के राधा मोहन सिंह, औरंगाबाद के सुशील कुमार सिंह, कटिहार के निखिल कुमार चौधरी, मुंगेर के राजीव रंजन सिंह उर्फ़ ललन सिंह, मधेपुरा के सांसद शरद यादव आदि हैं. वैसे कुछ सांसदों ने योजनाओं की अनुशंसा की हैं, उनमे पहले स्थान पर किशनगंज के सांसद मो. अख्तरूल, कैप्टेन जय नारायण निषाद, लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार, सिवान के ओम प्रकाश यादव, हुकुमदेव नारायण यादव और शत्रुघ्न सिन्हा शामिल हैं. फिलवक्त केंद्र सरकार ने एमपी फंड प्रति वर्ष २ करोड़ से बढ़ा कर ५ करोड़ दर दिया हैं. ४० लोकसभा और १६ राज्यसभा सदस्यों के २८० करोड़ रुपये इस सुस्त चाल से कैसे खर्च होंगे? यंहा सवाल यह नहीं है कि ये पैसे केंद्र के हैं या राज्य के, इसे विकास कार्यों पर खर्च तो बिहार में ही होना हैं. फिर बिहार को विकास की पटरी पर दौड़ाने का दावा करने वालों को इसमें आपति कैसी?
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